पतंग  माझा डोर  बन रहीलोगों की जान का दुश्मन  प्रशासन ले कोई एक्शन।

पतंग माझा डोर बन रहीलोगों की जान का दुश्मन प्रशासन ले कोई एक्शन।

मकर संक्रांति : परंपरा, उल्लास और जिम्मेदारी का पर्व ,
दो दिन पश्चात मकर संक्रांति का पावन पर्व पूरे देश में श्रद्धा, उल्लास और सामाजिक समरसता के साथ मनाया जाएगा। यह पर्व विशेष रूप से सनातन परंपरा में महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। पंचांग एवं ज्योतिषीय दृष्टि से भी मकर संक्रांति का विशेष महत्व है, क्योंकि इसी दिन सूर्य देव धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिससे शुभ कार्यों की शुरुआत मानी जाती है।
भारतीय पर्व और परंपराएँ हमारे जीवन का अभिन्न अंग हैं—इसमें कोई दो मत नहीं। भारतीय त्योहारों में जो आत्मीय आनंद, अपनापन और सामूहिक उल्लास देखने को मिलता है, वह विश्व में अद्वितीय है। एक-दूसरे से मिलना, स्नेह का आदान-प्रदान करना, उपहार देना तथा तिल-गुड़ जैसे प्रतीकात्मक पदार्थों के माध्यम से मधुर संबंधों का संदेश देना हमारी सनातन संस्कृति की विशेष पहचान है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और आज भी सामाजिक एकता को मजबूत कर रही है।
मकर संक्रांति के अवसर पर कुछ पारंपरिक भारतीय खेलों का भी विशेष महत्व रहा है। गिल्ली-डंडा जैसे खेल कभी ग्रामीण जीवन की पहचान हुआ करते थे, वहीं समय के साथ पतंगबाजी इस पर्व का अभिन्न हिस्सा बन गई। पतंग उड़ाना कभी केवल आनंद, कौशल और उत्सव का प्रतीक हुआ करता था, किंतु दुर्भाग्यवश आज यह एक बड़े व्यवसाय का रूप ले चुका है और कई बार जानलेवा भी सिद्ध हो रहा है।
विशेष चिंता का विषय यह है कि पतंगबाजी में प्रयुक्त चाइनीज मांझा एवं अन्य खतरनाक डोर आज आमजन के लिए गंभीर खतरा बन चुकी हैं। आए दिन समाचारों में देखने को मिलता है कि इस मांझे की चपेट में आकर लोग गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं, कई बार निर्दोष नागरिकों और पशु-पक्षियों को अपनी जान तक गंवानी पड़ रही है। यह स्थिति अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है।
अक्सर देखने में आता है कि जब कोई बड़ा हादसा घटित होता है, तभी प्रशासन और शासन की नींद खुलती है। जबकि आवश्यकता इस बात की है कि हादसे से पहले सख्त और प्रभावी कदम उठाए जाएँ। मकर संक्रांति के दिन बड़ी संख्या में लोग पतंगबाजी करेंगे और पतंग काटने की होड़ में खतरनाक मांझे का उपयोग और बढ़ सकता है, जो सार्वजनिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।
स्थानीय प्रशासन से अपेक्षा है कि जहाँ कहीं भी चाइनीज मांझा या अन्य प्रतिबंधित व खतरनाक डोर बेची जा रही हो, वहाँ तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए। न केवल बेचने वालों पर, बल्कि जानबूझकर इसका उपयोग करने और खरीदने वालों पर भी सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही जन-जागरूकता अभियान चलाकर नागरिकों को इसके दुष्परिणामों से अवगत कराना अत्यंत आवश्यक है।
समाज के जागरूक नागरिकों का भी यह नैतिक दायित्व है कि वे अपने बच्चों, परिवारजनों और मित्रों को इस प्रकार के खतरनाक मांझे का उपयोग न करने के लिए प्रेरित करें। पर्व का आनंद तभी सार्थक है, जब वह किसी के जीवन के लिए खतरा न बने।
आइए, इस मकर संक्रांति पर हम यह संकल्प लें कि परंपराओं का निर्वहन करते हुए मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक जिम्मेदारी और जीव-जंतुओं की सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखें। तभी यह पर्व वास्तव में सुख, समृद्धि और मंगलकामनाओं का संदेश दे सकेगा।
— संजय जोशी
आष्टा

📞 9993169734

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