टीईटी विवाद: विभाग अपनी ही गलतियों के जाल में फंसा, शिक्षक बोले—अब सुप्रीम कोर्ट में खुलेगा पूरा सच

टीईटी विवाद: विभाग अपनी ही गलतियों के जाल में फंसा, शिक्षक बोले—अब सुप्रीम कोर्ट में खुलेगा पूरा सच

टीईटी विवाद: विभाग अपनी ही गलतियों के जाल में फंसा, शिक्षक बोले—अब सुप्रीम कोर्ट में खुलेगा पूरा सच


आरटीई एक्ट की धारा 23 के उल्लंघन का आरोप, 2010 से 2026 तक बिना टीईटी शिक्षकों से पढ़ाने पर उठे सवाल
आष्टा/भोपाल। मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर जारी विवाद अब नए मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। शिक्षक वर्ग के प्रतिनिधियों ने स्कूल शिक्षा विभाग पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि विभाग अपनी ही प्रशासनिक गलतियों के चक्रव्यूह में फंस चुका है और आने वाले समय में इसका पूरा सच न्यायालय में सामने आएगा।
शिक्षकों का कहना है कि Right of Children to Free and Compulsory Education Act, 2009 की धारा 23 के अनुसार वर्ष 2010 के बाद नियुक्त होने वाले प्रत्येक शिक्षक के लिए नियुक्ति से पहले शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) उत्तीर्ण करना अनिवार्य था। इसके बावजूद प्रदेश में शिक्षाकर्मी, संविदा शिक्षक और गुरुजी वर्ग के हजारों अध्यापकों को बिना टीईटी पास किए ही वर्षों तक पढ़ाने की अनुमति दी गई।
बताया जा रहा है कि वर्ष 2018 में इन सभी वर्गों के अध्यापकों को 1 जुलाई 2018 से प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षक पदों पर नियुक्ति आदेश जारी किए गए और यही जानकारी वित्त विभाग के IFMIS Portal में भी दर्ज की गई। शिक्षक प्रतिनिधियों का सवाल है कि जब कानून के अनुसार टीईटी अनिवार्य था, तो फिर बिना पात्रता परीक्षा के इन नियुक्तियों को कैसे वैध माना गया।
शिक्षक संगठनों का आरोप है कि यदि अधिनियम के नियमों का पालन किया जाता तो वर्ष 2010 से ही सभी शिक्षकों की पात्रता परीक्षा कराई जानी चाहिए थी। लेकिन विभाग ने ऐसा नहीं किया और 2010 से 2026 तक लाखों बच्चों को नियम अनुसार पात्र शिक्षकों से शिक्षा दिलाने की व्यवस्था भी सुनिश्चित नहीं की।
शिक्षक प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि हाल ही में टीईटी से संबंधित जारी कुछ पत्रों से शिक्षकों के बीच भय और भ्रम की स्थिति बनाई जा रही है, जबकि वास्तविकता यह है कि विभाग स्वयं अपने निर्णयों और प्रक्रियाओं के कारण कानूनी रूप से कमजोर स्थिति में है।
उन्होंने कहा कि पूरे मामले का विस्तृत दस्तावेजीकरण किया जा चुका है और जल्द ही इसे Supreme Court of India के समक्ष रखा जाएगा। वहां यह सवाल उठाया जाएगा कि जब कानून स्पष्ट था तो विभाग ने समय पर टीईटी परीक्षा क्यों नहीं कराई और बिना पात्रता परीक्षा के नियुक्तियां कैसे जारी की गईं।
शिक्षक प्रतिनिधियों ने प्रदेश के सभी शिक्षकों से अपील की है कि वे अफवाहों और भ्रामक प्रचार से बचें तथा एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएं। उनका कहना है कि यदि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होती है तो विभागीय स्तर पर हुई गंभीर प्रशासनिक खामियां सामने आ सकती हैं और शिक्षकों के हित में रास्ता निकल सकता है।
फिलहाल इस पूरे मामले में स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन टीईटी को लेकर उठे सवालों ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में नई बहस जरूर छेड़ दी है। और मुद्दे की बात तो यह है कि इस विषय में उच्च अधिकारियों के पास भी स्पष्ट रूप से जानकारी अप्राप्त है। कहीं पर भी नियम स्पष्ट नहीं है।

संजय जोशी

9993169734

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